गणपति विसर्जन की याद में छोटी सी कविता
तेरी याद में फिर क्यों खामोशी छा जाएगी, अगले बरस फिर आओगे इसी खुशी में हल्की सी खुशी आ जाएगी।
अगली सुबह जब तुमको न देख पाऊंगा रोज की तरह , तो तेरे आध्यात्मिक मर्म को जानकर कि ईश्वर हर जगह हर कण कण और मन मे है इसी विश्वास से पुनः तेरी कमी भर जाएगी।। -विजय
गणपति बप्पा मौर्या, मंगल मूर्ति मौर्या।।
तेरी याद में फिर क्यों खामोशी छा जाएगी, अगले बरस फिर आओगे इसी खुशी में हल्की सी खुशी आ जाएगी।
अगली सुबह जब तुमको न देख पाऊंगा रोज की तरह , तो तेरे आध्यात्मिक मर्म को जानकर कि ईश्वर हर जगह हर कण कण और मन मे है इसी विश्वास से पुनः तेरी कमी भर जाएगी।। -विजय
गणपति बप्पा मौर्या, मंगल मूर्ति मौर्या।।
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