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Showing posts from March, 2020

*महत्वपूर्ण अपडेट एवं जॉब अलर्ट*

*महत्वपूर्ण अपडेट एवं जॉब अलर्ट* ♻️ **राजस्थान में कंप्यूटर टीचर के 3rd...2nd एवं व्याख्याता के पदों पर होंगी भर्ती* https://www.sbresult.com/2020/02/computer-teacher-recruitment-2020.html?m=1 👉 *APSSB ने Forester, Head Constable, Fireman, Constable, Forest Guard, Mineral Guard & H/C Driver के 924 पदों पर भर्ती के लिये Notification किया जारी, यहाँ से देखें भर्ती विवरण....* https://www.sbresult.com/2020/02/apssb-forester-head-constable-fireman.html?m=1 ♻️ *राजस्थान स्वास्थ्य मित्र भर्ती 2020 की विज्ञप्ति जारी....करीब 1 लाख पदों पर होंगी भर्ती* https://www.sbresult.com/2020/03/rajasthan-swasthya-mitra-recruitment.html?m=1  ♻️ *राजस्थान गृह विभाग में होम गार्ड के पदों पर भर्ती की विज्ञप्ति जारी....2500 पदों पर होंगी भर्ती* https://www.sbresult.com/2020/03/rajasthan-home-guard-recruitment-2020.html?m=1 *Rajasthan budget 2020|| 53000 पदों पर होंगी भर्तियां|| कम्प्यूटर टीचर का बनेगा नया कैडर...होंगी भर्ती.....* https://www.sbresult.com/2020/02/rajasthan-budget-2020-53000.html?m=1 *S...

संधि विच्छेद, संस्कृत में संधि, संस्कृत व्याकरण*

*संधि विच्छेद, संस्कृत में संधि, संस्कृत व्याकरण* *SANDHI:- Sanskrit Sandhi*  संस्कृत में संधि विच्छेद दो वर्णों के निकट आने से उनमें जो विकार होता है उसे ‘सन्धि’ कहते है। इस प्रकार की सन्धि के लिए दोनों वर्णो का निकट होना आवश्यक है, क्योकि दूरवर्ती शब्दो या वर्णो में सन्धि नहीं होती है। वर्णो की इस निकट स्थिति को ही सन्धि कहते है। अतः संक्षेप में यह समझना चाहिए कि दो वर्णो के पास-पास आने से उनमें जो परिवर्तन या विकार होता है उसे संस्कृत व्याकरण में सन्धि कहते है।  उदाहरण - हिम + आलयः = हिमालयः रमा + ईशः = रमेंशः सूर्य + उदयः = सूर्योदयः संस्कृत संधि के भेद/प्रकार *संस्कृत भाषा में संधियां तीन प्रकार* की होती है- ●स्वर संधि ●व्यंजन संधि ●विसर्ग संधि *1. स्वर संधि* - अच् संधि नियम - दो स्वरों के मेल से होने वाले विकार (परिवर्तन) को स्वर-संधि कहते हैं।  *उदाहरण-* हिम+आलय= हिमालय। रवि + इंद्र = रवींद्र मुनि + इंद्र = मुनींद्र नारी + इंदु = नारींदुई मही + ईश = महीश भानु + उदय = भानूदय लघु + ऊर्मि = लघूर्मि वधू + उत्सव = वधूत्सव भू + ऊर्ध्व = भूर्ध्व संस्कृत में *स्वर-संधि आठ ...

संस्कृत संज्ञाप्रकरणम्

*संज्ञाप्रकरणम्:-* *माहेश्वर सूत्राणि:-* माहेश्वर सूत्र (संस्कृत: शिवसूत्राणि या महेश्वर सूत्राणि) को संस्कृत व्याकरण का आधार माना जाता है। पाणिनि ने संस्कृत भाषा के तत्कालीन स्वरूप को परिष्कृत एवं नियमित करने के उद्देश्य से भाषा के विभिन्न अवयवों एवं घटकों यथा ध्वनि-विभाग (अक्षरसमाम्नाय), नाम (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण), पद, आख्यात, क्रिया, उपसर्ग, अव्यय, वाक्य, लिंग इत्यादि तथा उनके अन्तर्सम्बन्धों का समावेश अष्टाध्यायी में किया है। अष्टाध्यायी में ३२ पाद हैं जो आठ अध्यायों मे समान रूप से विभक्त हैं। *उत्पत्ति:-* माहेश्वर सूत्रों की उत्पत्ति भगवान नटराज (शिव) के द्वारा किये गये ताण्डव नृत्य से मानी गयी है। *नृत्तावसाने नटराजराजो ननाद ढक्कां नवपञ्चवारम्।* *उद्धर्तुकामः सनकादिसिद्धान् एतद्विमर्शे शिवसूत्रजालम् ॥* अर्थात:- "नृत्य (ताण्डव) के अवसान (समाप्ति) पर नटराज (शिव) ने सनकादि ऋषियों की सिद्धि और कामना का उद्धार (पूर्ति) के लिये नवपंच (चौदह) बार डमरू बजाया। इस प्रकार चौदह शिवसूत्रों का ये जाल (वर्णमाला) प्रकट हुयी।" डमरु के चौदह बार बजाने से चौदह सूत्रों के रूप में ध्वनियाँ...